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Monday, September 26, 2022
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US Federal Reserve Bank Rate of Interest Hikes: पहले कोरोना महामारी और अब रूस-यूक्रेन युद्ध ने दुनिया के तमाम देशों की अर्थव्यवस्थाओं को दबाव में ला दिया है. इस दबाव से विश्व की एकमात्र महाशक्ति अमेरिका भी अछूता नहीं है. अमेरिका मुद्रास्फीति की दर काफी बढ़ गई है, जिससे वहां हर चीज पर महंगाई बढ़ी है. इससे निपटने के लिए अमेरिका के फेडरल रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला किया है. माना जा रहा है कि इस फैसले से अमेरिका में कई कारोबार तबाह हो सकते हैं और लोगों को गरीबी-बेरोजगारी भुगतनी पड़ सकती है. 

बुधवार को हुई मीटिंग में लिया गया फैसला

रिपोर्ट के मुताबिक फेडरल रिजर्व बैंक (US Federal Reserve Bank) के अधिकारियों ने बुधवार को हाई लेवल मीटिंग की. इस बैठक में मुद्रा स्फीति को काबू करने के तरीकों के बारे में चर्चा की गई. डिस्कशन के बाद अधिकारियों ने ब्याज दरों में 75 आधार अंकों की और बढ़ोतरी करने का फैसला किया. यह फैसला अगस्त में अचानक से महंगाई बढ़ने और जॉब मार्केट में बढ़ोतरी के कारण लिया गया है. बैंक के चेयरमैन Jerome Powell ने बुधवार को यह जानकारी दी. 

अमेरिका में बेरोजगारी बढ़ने का खतरा

जेरोम पॉवेल ने कहा कि वे बढ़ती मुद्रास्फीति को एक या दूसरे तरीके से समाप्त कर देंगे. ब्याज दरों में वृद्धि के साथ आने वाले खतरनाक आर्थिक नतीजों से उन्हें कोई दिक्कत नहीं है. वे इसका कोई न कोई समाधान निकाल लेंगे. वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​​​है कि देश में उपभोक्ता वस्तुओं की बढ़ती मांग और उनकी कीमतों में हो रही बढ़ोतरी पर अंकुश लगाने के लिए फेडरल रिजर्व बैंक ने यह दांव खेला है. एक्सपर्टों के मुताबिक यह दांव कितना कामयाब होगा, यह तो वक्त बताएगा लेकिन इसके इससे अमेरिका में बेरोजगारी की दर बढ़ जाएगी. 

लगातार तीसरी बार बढ़ाई गई ब्याज दरें

यूएस फेडरल रिजर्व बैंक (US Federal Reserve Bank) ने बुधवार को ब्याज दर को तीन-चौथाई प्रतिशत बढ़ाकर 3.00% -3.25% की सीमा तक बढ़ा दिया. ऐसा बैंक की ओर से लगातार तीसरी बार किया गया. इसके साथ ही बैंक ने संकेत दिया है कि बढ़ती मुद्रा स्फीति पर अंकुश लगाने के लिए वह भविष्य में ब्याज दरों में और ज्यादा बढ़ोतरी कर सकता है. अमेरिका में महंगाई इस समय 40 साल के उच्चतम स्तर पर है.

तेल की कीमतों में आई गिरावट

फेडरल रिजर्व बैंक (US Federal Reserve Bank)की ओर से मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का अमेरिका में तुरंत असर नजर आया. ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी होते ही वहां पर तेल की कीमतें गिर गईं. Brent futures तेल के दाम में 54 सेंट की कमी हो गई और वह 90.08 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. वहीं US West Texas Intermediate (WTI) क्रूड ऑयल 71 सेंट या 0.9% गिरकर 83.23 डॉलर हो गया. माना जा रहा है कि बैंक के इस फैसले से अमेरिका में कारोबारी गतिविधियों के लिए लोगों को पैसा जुटाना मुश्किल हो सकता है, जिसका असर वहां की कारोबारी गतिविधियों पर पड़ेगा. 

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Credit : http://zeenews.india.com

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