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Saturday, July 2, 2022
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Husband can use late wife embryo to have child after she died suddenly | बच्चा पैदा करने के लिए पति को मिली दिवंगत पत्नी के भ्रूण का इस्तेमाल करने की अनुमति


Latest Trending News: आईवीएफ टेक्निक से प्रेग्नेंसी को लेकर भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में अभी भी तमाम जटिलताएं हैं और कई नियम स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन इन सबके बीच लंदन से एक अच्छी खबर सामने आई है. यहां उत्तरी लंदन में रहने वाले 38 वर्षीय टेड जेनिंग्स को आखिरकार उनके शुक्राणु से बनाए गए भ्रूण और उनकी दिवंगत पत्नी फर्न-मैरी चोया के अंडे/डिंब का उपयोग करने की मंजूरी अदालत से मिल गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, चोया की 2019 में गर्भ टूटने के बाद मृत्यु हो गई थी, उस वक्त वह जुड़वां लड़कियों के साथ 18 सप्ताह की गर्भवती थीं. 40 वर्षीय चोया  2013 के बाद से कई आईवीएफ चक्रों से गुजरी थीं और कई बार दुखद रूप से उनका गर्भपात हुआ था.

पत्नी की मौत के बाद मांगी थी अनुमति

पत्नी की मौत के बाद टेड जेनिंग्स एक सरोगेसी के लिए 2018 में पत्नी के साथ मिलकर बनाए गए एक बचे हुए भ्रूण का उपयोग करना चाहते थे. यह भ्रूण लंदन में एक निजी प्रजनन क्लिनिक में सुरक्षित रखा गया है. उनकी अपील के बाद निवेश प्रबंधक ने उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश से कहा कि वह उसे कानूनी रूप से भ्रूण का उपयोग करने की अनुमति दें. अदालत से इसकी अनुमति इसलिए मांगी गई थी क्योंकि उसकी दिवंगत पत्नी मरने से पहले इस संबंध में लिखित सहमति नहीं दे पाई थीं. इस अर्जी को पहले ह्यूमन फर्टिलाइजेशन एंड एम्ब्रियोलॉजी अथॉरिटी (एचएफईए) ने खारिज कर दिया था.

जज ने याचिका के पक्ष में सुनाया फैसला

टेड जेनिंग्स की अर्जी पर सुनवाई करते हुए बुधवार को अदालत ने टेड के समर्थन में फैसला सुनाया. जज जस्टिस थीस ने कहा कि वह इस बात से संतुष्ट हैं कि चोया ने अपनी मृत्यु की स्थिति में भ्रूण का उपयोग करने के लिए सहमति दी थी. उन्होंने कहा कि चोया को लिखित रूप में सहमति देने का पर्याप्त अवसर उस समय नहीं मिल पाया था क्योंकि आईवीएफ प्रक्रिया के दौरान उन्होंने जो फॉर्म भरा था,  उसमें यह स्पष्ट नहीं था कि एक महिला को मृत्यु के बाद परिवार को सहमति प्रदान करने के लिए क्या करना चाहिए.

आगे बाधा नहीं होगी लिखित सहमति

जज ने कहा कि, इस मामले में व्यक्तियों के अधिकारों का कोई टकराव नहीं है और जेनिंग्स को अनुमति देना वैधानिक योजना के एक मौलिक उद्देश्य को कमजोर नहीं करेगा. न्यायाधीश ने यह भी कहा कि जेनिंग्स का मामले के बाद अब लिखित सहमति एक बाधा नहीं होगी.

घर रखना पड़ा था गिरवी

अदालत को सुनवाई के दौरान बताया गया कि अकाउंटेंट फर्न-मैरी ने 2013 और 2014 में आईवीएफ उपचार के तीन असफल चक्रों का सामना किया. उन्होंने 2015 और 2016 में स्वाभाविक रूप से गर्भधारण किया लेकिन दुखद रूप से दो गर्भपात का सामना करना पड़ा. गर्भधारण के लिए इलाज के खर्चों की वजह से दोनों  को घर गिरवी रखना पड़ा. 2018 के अंत में फर्न-मैरी गर्भवती हुई थीं, लेकिन 18 सप्ताह में जटिलताओं की वजह से गर्भाशय टूट गया. फरवरी में फर्न-मैरी की मौत के बाद उनके एक भ्रूण को भंडारण में रखा गया.



Credit : http://zeenews.india.com

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