Russia Ukraine War Jaishankar India Neutral Stance West Countries Answer – India Hindi News


ऐप पर पढ़ें

Russia Ukraine Conflict: पिछले नौ महीने से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है। जहां पश्चिमी देश रूस के पूरी तरह से खिलाफ हैं और कई तरह के प्रतिबंध लगा चुके हैं तो वहीं भारत का रुख तटस्थ रहा है। इसको लेकर पश्चिमी देशों ने कई बार सवाल भी खड़े किए हैं। अब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत के तटस्थ रुख को सही ठहराते हुए कहा है कि हम ‘अन्य लोगों’ की मांगों के लिए देश की विदेश नीति नहीं चला रहे हैं।

विदेश मंत्री ने कहा, ”मैं अन्य लोगों की मांगों के लिए विदेश नीति नहीं चला रहा हूं। (मेरी विदेश नीति) मेरे देश और मेरे लोगों के हित में है। मेरा मानना ​​है कि भारत के हितों की अच्छी तरह से सेवा की जाती है। (हम) गंभीरता की वकालत करते हैं और चाहते हैं कि युद्ध समाप्त हो। मुझे लगता है कि ऐसा करना सही है। अगर मैंने वही किया होता जो अमेरिका ने कहा था, तो मैं अपने सहित किसी के भी काम नहीं आता।”

भारत ने यूएन जैसे वैश्विक मंचों पर यूक्रेन में रूसी कार्रवाई की सख्ती से निंदा करने से अब तक परहेज किया है। हालांकि, यह बार कहा है कि मॉस्को और कीव के बीच कूटनीति के माध्यम से युद्ध का हल निकलना चाहिए। टाइम्स नाउ के अनुसार, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “कई बार हम भी उन चीजों के साथ रहें हैं जो आपने (पश्चिमी देशों) कीं। अब इसके साथ जिएं (भारत की विदेश नीति)।” उन्होंने आगे कहा कि भारत का रुख गंभीर रहा है। दुनिया को एक कठिन जगह बताते हुए जयशंकर ने कहा कि यह भारत के लिए आसान जगह नहीं हो सकती। चीन के साथ 1962 की हार और पिछली सरकारों की आलोचना करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि जिन स्थानों पर चीनी गांव सामने आ रहे हैं, वे ऐसे क्षेत्र हैं, जिन्हें हमने 1962 के युद्ध में खो दिया था। उन्होंने कहा, ”राजीव गांधी चीन की यात्रा पर गए, तब भारत और चीन एक ही आकार की अर्थव्यवस्थाएं थीं।”

‘चीन के मुद्दे पर अडिग रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी’

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी चीन के मुद्दे पर बहुत अडिग रहे हैं और उन्हें चीन-भारत सीमा पर हमारे सशस्त्र बलों की मजबूत तैनाती के आधार पर आंका जाना चाहिए। जयशंकर ने हाल ही में इंडोनेशिया के बाली में जी20 शिखर बैठक के दौरान प्रधानमंत्री के चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हाथ मिलाने को लेकर विपक्ष की आलोचना को खारिज कर दिया। जयशंकर ने कहा कि चीन के साथ लेनदेन में वास्तविकता यह है कि यह देश दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और भारत का निकटतम पड़ोसी है, लेकिन इसके साथ ही इस देश के साथ हमारा एक मुश्किल इतिहास, संघर्ष और एक बहुत बड़ा सीमा विवाद भी जुड़ा रहा है। 



Credit : https://livehindustan.com

Related Articles

Latest Articles

Top News