Maharashtra Politics Prakash Ambedkar joins hand with Uddhav Thackeray big jolt for BJP Thackeray and Ambedkar Family – कभी ठाकरे-अंबेडकर ने मिलकर लड़ी थी लंबी लड़ाई, तीसरी पीढ़ी फिर हुई एकसाथ; जानें


महाराष्ट्र में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम में भीमराव अम्बेडकर के पोते प्रकाश अम्बेडकर की अध्यक्षता वाली वंचित बहुजन अगाड़ी (VBA) ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन करने का फैसला किया है। राज्य के राजनीतिक हलकों में इस गठजोड़ को “शिव शक्ति और भीम शक्ति का गठबंधन” करार दिया जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि इस गठजोड़ से आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

दोनों परिवारों के बीच अच्छी बॉन्डिंग:

1950 के शुरुआती दशक में उद्धव ठाकरे के दादा प्रबोधंकर ठाकरे (बाला साहेब ठाकरे के पिता) और प्रकाश अंबेडकर के दादा भीमराव अंबेडकर (संविधान निर्माता) ने मिलकर सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। उनकी लड़ाई छूआछूत और ऊंची जातियों द्वारा दलितों पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ थी। तब दोनों परिवारों के बीच एक अच्छी बॉन्डिंग थीं। 

प्रबोधंकर ठाकरे, एक भारतीय समाज सुधारक थे। उन्होंने अंधविश्वास, छुआछूत, बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ अभियान चलाया था। वे एक लेखक भी थे। अब उद्धव ठाकरे ने तीन पीढ़ी पुराने रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश की है। प्रकाश अंबेडकर के मुताबिक उद्धव ठाकरे ने कुछ दिनों पहले ही गठबंधन का विषय उठाया था। उन्होंने कहा, “हमारे संगठन VBA के भीतर सावधानीपूर्वक विचार-विमर्श के बाद हमने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के साथ साझेदारी करने का फैसला किया है।”

लंबे समय से वंचितों के लिए लड़ रहे प्रकाश अंबेडकर:

प्रकाश अंबेडकर ने 2019 के लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले ही बहुजन वंचित अघाड़ी बनाई थी। इससे पहले वह रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया से जुड़े थे। उससे पहले भी अंबेडकर ने भारी बहुजन महासंघ बनाया था, जो दलितों को सामाजिक प्रतिनिधित्व दिलाने और उनके कल्याण के लिए काम करता था। बाद में उन्होंने जातिव्यवस्था के फलक से बाहर निकलते हुए व्यापक स्तर पर वंचितों को लेकर यानी ओबीसी और दलितों को साथ लेकर वंचित बहुजन अघाड़ी बनाई। 2019 में उन्होंने ओवैसी के साथ गठबंधन किया था। हालांकि, प्रकाश अंबेडकर की पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत सकी थी लेकिन उसे कुल 6.92 फीसदी वोट मिले थे।

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माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे और प्रकाश अंबेडकर का गठबंधन ओबीसी और दलित मतदाताओं का मजबूत गठजोड़ हो सकता है। यह सत्ताधारी बीजेपी के लिए बड़ा झटका है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक इस गठबंधन के प्रभावी होने से बीजेपी राज्य में आइसोलेशन में जा सकती है क्योंकि उसे अभी तक ओबीसी वोट के बंटवारे का लाभ मिलता रहा है।

VBA ने 2019 में कांग्रेस-एनसीपी को पहुंचाया था नुकसान:

वंचित बहुजन अघाड़ी ने 2019 में 8-10 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस-एनसीपी को नुकसान पहुंचाया था। ओबीसी वोट के बंटने से बीजेपी को इसका फायदा मिला था, जबकि मराठा वोट बैंक एनसीपी की तरफ केंद्रित था। विधानसभा चुनावों में भी वंचित अघाड़ी ने 32 सीटों पर करीब एक से डेढ़ लाख वोट हासिल कर कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन को नुकसान पहुंचाया था और बीजेपी-शिवसेना को इसकी वजह से इतनी सीटों पर जीत मिली थी।

बीजेपी गठबंधन को होगी मुश्किल:

महाविकास अघाड़ी के पक्ष में ओबीसी, मराठों और दलितों के एकजुट होने से महाराष्ट्र में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को एक विकट चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। अतीत में बीजेपी ने अपने लाभ के लिए मराठा बनाम ओबीसी ध्रुवीकरण का फायदा उठाया था। मराठा वोट बैंक का झुकाव कांग्रेस-एनसीपी की तरफ रहा है। वहीं बीजेपी राज्य में ओबीसी को लुभाने के लिए पूरी कोशिश करती रही है। 

2014 में, नरेंद्र मोदी फैक्टर ने बीजेपी को जनता तक न सिर्फ बड़े पैमाने पर पहुंचाया था बल्कि ज्यादा से ज्यादा सीटें भी दिलाई थीं। शिव सेना के साथ गठबंधन करने वाली बीजेपी तब लोकसभा चुनावों में कुल 48 सीटों में से 23 और राज्य विधानसभा चुनावों में 288 सीटों में से 133 सीटें जीती थी।

महाविकास अघाड़ी गठबंधन में है पेंच : 

अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वंचित बहुजन अघाड़ी महाविकास अघाड़ी में शामिल होगा या नहीं? क्योंकि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस-एनसीपी को प्रकाश अंबेडकर की वजह से बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। हालांकि, यह संभव है कि बीजेपी के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस और एनसीपी उद्धव के नए दोस्त को अपना दोस्त मान लें या उद्धव ठाकरे ही आगामी बीएमसी चुनावों और 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अपने कोटे से वंचित बहुजन अघाड़ी को कुछ सीटें दे दें। कुल मिलाकर यह गठबंधन 2024 के लोकसभा चुनाव तक जारी रह सकता है।

अगर कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट और वंचित विकास अघाड़ी मिलकर एक बड़ा गठबंधन यानी महाविकास अघाड़ी बनाने में कारगर हो जाते हैं तो बीजेपी और एकनाथ शिंदे के गुट वाली शिवसेना को आगामी चुनावों खासकर बीएमसी चुनावों में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है और अगर यह महागठबंधन 2024 तक जारी रहता है तो बीजेपी के लिए खतरे की घंटी हो सकती है।



Credit : https://livehindustan.com

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