Gujarat Assembly Election villagers boycotted poll demanding road construction no road no vote poster – गुजरात के इन गांवों को अभी भी है सड़क का इंतजार, ग्रामीणों ने कहा


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गुजरात विधानसभा के पहले चरण के चुनाव में अब पांच दिन ही रह गए हैं। एक तरफ जहां सभी राजनीतिक दलों के लोग हरेक गांव और हरेक दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं, वहीं राज्य के कुछ गांव ऐसे हैं, जो किसी भी राजनीतिक दल को अपने गांव में चुनाव प्रचार करने के लिए घुसने नहीं दे रहे हैं। इन गांव वालों ने 2022 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने का ऐलान किया है।

राज्य के छोटे से अरावली जिले का चेहवाना मुवाडा गांव एक ऐसा ही गांव है, जहां चुनाव का प्रचार करने वालों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया है। गांव वालों का कहना है कि जब तक गांव के लिए पक्की सड़क नहीं बनाई जाती, तब तक वे लोग वोट नहीं देंगे। ग्रामीणों ने ‘नो रोड, नो वोट’ का बैनर भी गांव के बाहर लगा दिया है। 

200 की आबादी वाले इस छोटे से गांव में एक प्राइमरी स्कूल तो है लेकिन मुख्य सड़क से यहां तक आने के लिए तीन किलोमीटर की कच्ची सड़क है, जिस पर कई गड्ढे हैं। मेडिकल इमरजेंसी में बुजुर्गों को या बीमारों को लाने-ले जाने में काफी परेशानी होती है। मजबूरी में लोग चारपाई पर टांग कर उन्हें ले जाते हैं क्योंकि एम्बुलेंस वहां नहीं पहुंच सकता है। चार महीने की बरसात में यह गांव शहर से कट जाता है। यहां से निकलना मुश्किल हो जाता है।

इसी तरह का एक और गांव है, जहां के लोगों ने वोट का बहिष्कार किया है लेकिन उनकी मांग सड़क बनवाने की नहीं बल्कि रेत माफिया पर लगाम लगाने की है। नर्मदा जिले के ओरी गांव के लोगों का कहना है कि अवैध बालू उत्खनन और उसकी ढुलाई की वजह से इलाके के खेतों में रेत पसर जाता है, जिससे न सिर्फ उनकी फसल चौपट होती है बल्कि ट्रकों से होने वाली रेत की ढुलाई की वजह से उनके घरों में भी रेत धूल के रूप में पहुंच रहा है। इससे उनका स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां भी ग्रामीणों ने वोट के बहिष्कार का ऐलान करते हुए गांव के बाहर उसका बैनर लगा दिया है। यहां भी ग्रामीण किसी भी प्रत्याशी को चुनाव प्रचार करने के लिए गांव में घुसने नहीं दे रहे हैं।

 



Credit : https://livehindustan.com

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